ॐ रजोगुणातीताय नमः
रजोगुणातीतः
Rajoguṇātītaḥ
Root: rajas + guṇa + atīta
अर्थ
He who has transcended the quality of rajas, the divine being beyond the restless energy of ambition, desire, and agitated action
रज-गुण से परे, रजस की बेचैन ऊर्जा, महत्त्वाकांक्षा, इच्छा और उत्तेजित क्रिया से परे दिव्य सत्ता
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
रजस्
the quality of restlessness, passion, agitation
रजस्, बेचैनी, जोश, उत्तेजना
गुण
quality, attribute
गुण, विशेषता
अतीत
transcended, beyond, past
अतीत, परे, पार
आधुनिक संदर्भ
सांख्य और वेदान्त परम्पराएँ मानव चेतना को तीन गुणों के प्रभाव में काम करते हुए वर्णित करती हैं: तमस (जड़ता), रजस (बेचैन ऊर्जा), और सत्त्व (स्पष्टता)। अधिकांश समकालीन भारतीय शहरी जीवन उच्च रजस पर काम करता है: निरन्तर उत्तेजना, प्रतिस्पर्धात्मक दबाव, डिजिटल संलग्नता, और उपलब्धि अभिमुखता मन को उत्तेजित क्रिया की शाश्वत अवस्था में रखती है। ४१ दिनों की दीक्षा अनिवार्य रूप से एक रजस-न्यूनीकरण कार्यक्रम है: ठण्डा पानी शरीर की ताप सक्रियता कम करता है; सादा भोजन तंत्रिका संबंधी अति-उत्तेजना कम करता है; जप रजस-चालित मानसिक क्रिया को सत्त्व-उत्पादन चिन्तन से बदल देता है। जिस प्रभु ने रजस को पूरी तरह पार कर लिया है वे वह अन्त-बिन्दु हैं जिसकी ओर यह कार्यक्रम इंगित करता है।
कब जपें
ॐChant when the rajasic quality of restlessness, agitation, and feverish ambition needs to be calmed. The Lord's transcendence of rajas is available as a modulating influence through His name.
और पवित्रता नाम
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