ॐ शुद्धसत्त्वाय नमः
शुद्धसत्त्वः
Śuddhasattvaḥ
Root: śuddha + sattva
अर्थ
He of pure sattva, in whom luminous goodness is completely unalloyed by any trace of tamas or rajas
शुद्ध सत्त्व वाले, जिनमें प्रकाशमान अच्छाई तमस या रजस के किसी लेशमात्र से पूर्णतः अमिश्रित है
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
शुद्ध
pure, unalloyed
शुद्ध, असंमिश्रित
सत्त्व
the quality of luminous goodness
सत्त्व, प्रकाशमान गुण
आधुनिक संदर्भ
आयुर्वेदिक दर्शन में सात्त्विक भोजन स्पष्टता और मानसिक सन्तुलन को बढ़ावा देता है। दीक्षा आहार सात्त्विक सिद्धान्तों के निकट है: ताज़ी सब्जियाँ, फल, साबुत अनाज, माँस नहीं, उत्तेजक पदार्थ नहीं। ४१ दिनों का अभ्यास एक निरन्तर सात्त्विक तीव्रीकरण है: जैसे-जैसे आहार शुद्ध होता है, मन स्पष्ट होता है, और भक्त उस चेतना के साथ प्रभु के पास पहुँचता है जो उनके शुद्धसत्त्व को तेजी से दर्पण करती है।
कब जपें
ॐChant at the end of the 41-day deeksha when the sattvic quality is at its most refined, offering the purified self at the Lord's feet.
और पवित्रता नाम
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