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ॐ वर्णाश्रमधर्मपालकाय नमः

वर्णाश्रमधर्मपालकः

Varṇāśramadharmapalākaḥ

Root: varṇa + āśrama + dharma + palāka

Cosmic Order·ब्रह्माण्डीय व्यवस्था
Meaning

अर्थ

The upholder of Varnashrama Dharma, who protects the proper functioning of society's diverse vocations and life-stages

वर्णाश्रम धर्म के पालक, जो समाज के विविध व्यवसायों और जीवन-अवस्थाओं के उचित कार्य की रक्षा करते हैं

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

वर्ण

the four functional divisions of society

वर्ण, समाज के चार कार्यात्मक विभाग

आश्रम

the four stages of life

आश्रम, जीवन की चार अवस्थाएँ

धर्म

right conduct, duty

धर्म, कर्तव्य

पालक

upholder, protector

पालक, रक्षक

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

वर्णाश्रमधर्मपालक सहस्रनाम में सबसे सामाजिक रूप से जटिल नामों में से एक है। वर्णाश्रम प्रणाली अपने मूल वैदिक आशय में चार कार्यात्मक भूमिकाओं और चार जीवन-अवस्थाओं का वर्णन थी, पूरक न कि पदानुक्रमिक। दत्तात्रेय इसके पालक के रूप में वह देवता हैं जो प्रत्येक व्यक्ति के अपने धार्मिक कार्य को गरिमा के साथ पूरा करने के अधिकार की रक्षा करते हैं। दत्त सम्प्रदाय स्वयं व्यवहार में उल्लेखनीय रूप से जाति-विरोधी है: दत्तात्रेय के चार कुत्ते ऋषि के चरणों में समान गरिमा के साथ चारों वर्णों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह नाम दत्तात्रेय के उत्पीड़न को अनुमति दिए बिना कार्यात्मक सामाजिक विविधता की रक्षा के रूप में सबसे अच्छा समझा जाता है।

When to Chant

कब जपें

Chant when seeking to fulfil one's own dharmic duty with integrity, during Dharmashastra study, or when praying for the healthy functioning of a just and diverse society.

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