ॐ संसारसारथये नमः
संसारसारथिः
Saṃsārasārathayeḥ
Root: saṃsāra + sārathi
अर्थ
The charioteer of worldly existence, who guides the souls through the cycles of birth and death toward the destination of liberation
संसार के सारथी, जो आत्माओं को जन्म-मृत्यु के चक्रों से होते हुए मुक्ति के गन्तव्य की ओर मार्गदर्शन करते हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
संसार
worldly existence, the cycle of birth and death
संसार, जन्म-मृत्यु का चक्र
सारथि
charioteer, guide, driver
सारथि, रथ-चालक, मार्गदर्शक
आधुनिक संदर्भ
भगवद् गीता की केन्द्रीय छवि कृष्ण की है जो अर्जुन को कुरुक्षेत्र के युद्ध से होते हुए मार्गदर्शन करने वाले सारथी हैं। संसारसारथि के रूप में अय्यप्पा यही दार्शनिक प्रतिरूप वहन करते हैं: वह प्रभु जो जीवन के वाहन में संघर्षरत आत्मा के पास बैठते हैं, लगाम थामते हैं, भूमि जानते हैं, हर कठिनाई से होते हुए उस गन्तव्य की ओर चलाते हैं जिसे आत्मा ने स्वयं भूल गई हो। ४१ दिनों की दीक्षा एक ऐसा अवसर है जब भक्त स्पष्ट रूप से प्रभु को लगाम सौंपता है: 'इन ४१ दिनों के लिए आप चलाएँ; मैं आपके मार्ग का अनुसरण करूँगा।' यात्रा की बुद्धि यह है कि इस व्यवस्था को अनिश्चित काल तक बढ़ाया जा सकता है।
कब जपें
ॐChant when life's path seems confused and directionless, or when the Lord's guidance is sought through the complexities of samsara's terrain.
और मोक्ष नाम
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