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240

ॐ सर्वदाय नमः

सर्वदः

Sarvadaḥ

Root: sarva + da

Prosperity·समृद्धि
Meaning

अर्थ

The giver of everything, who holds nothing back from the sincere seeker who comes with an open heart and surrendered hands

सब कुछ देने वाले, जो उस सच्चे साधक से कुछ भी नहीं रोकते जो खुले हृदय और समर्पित हाथों के साथ आता है

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

सर्व

all, everything

सब, सम्पूर्ण

giver

दाता

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

सर्वद आठवीं श्रृंखला को कुल दिव्य उदारता की अभिव्यक्ति के साथ बन्द करता है: दत्तात्रेय सब कुछ देते हैं। 'कई चीज़ें' नहीं, 'अधिकांश चीज़ें' नहीं, बल्कि सर्व: सब। यह दत्त परम्परा की कृपा की समझ की परम घोषणा है: वह कुछ भी नहीं रोकती। गुरु चरित्र का सुसंगत सन्देश है कि नृसिंह सरस्वती ने पूरी तरह दिया: बीमारों को स्वास्थ्य, सन्तानहीनों को सन्तान, भ्रमितों को धर्म, सच्चे लोगों को मुक्ति। सर्वद दत्तात्रेय अक्षय दाता हैं। 240वें नाम पर भक्त ने 30 की आठ श्रृंखलाएँ पूरी की हैं, और 768 नाम प्रतीक्षारत हैं। सर्वद घोषणा करता है: दाता ने अभी तक वह भी नहीं दिया जो उनके पास है का अंश। फिर शुरू करो।

When to Chant

कब जपें

Chant at the close of batch eight as a comprehensive blessing, declaring that Dattatreya holds back nothing of his divine abundance for those who sincerely approach him.

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