ॐ महाक्रान्ताय नमः
महाक्रान्तः
Mahākrāntaḥ
Root: mahā + krānta
अर्थ
The supremely striding, who pervades and pervades and pervades with the greatest possible presence , the divine whose stride (krānti) fills every dimension of existence with his encompassing reach
परम गतिशील, जो सबसे बड़ी संभव उपस्थिति के साथ व्याप्त होते और व्याप्त होते हैं , वह दिव्य जिनका कदम (क्रांति) अपनी व्यापक पहुँच से अस्तित्व के हर आयाम को भरता है
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
महा
great, supreme
महान, परम
क्रान्त
striding, pervading with great steps
क्रांत, महान कदमों से व्याप्त
आधुनिक संदर्भ
महाक्रांत (परम गतिशील) शिव को उस सत्ता के रूप में नामित करता है जिनकी व्यापक उपस्थिति सब कुछ सबसे बड़ी संभव पहुँच के साथ समेटती है। वैदिक पौराणिकता में सबसे प्रसिद्ध क्रांत विष्णु का त्रिविक्रम (तीन कदम जो पूरे ब्रह्माण्ड को कवर करते हैं) है। शिव महाक्रांत के रूप में इससे भी बड़ी चाल रखते हैं। वाराणसी की पंचकोस यात्रा (पाँच-कोस परिक्रमा) इसे अनुष्ठानित करती है: भक्त के पैर शिव की व्यापक चाल में भाग ले रहे हैं।
कब जपें
ॐChant to invoke the mahā-krānta , the great pervading stride of the divine that fills every dimension of existence with Shiva's all-encompassing presence.
और ब्रह्माण्डीय व्यवस्था नाम
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