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ॐ निष्परिग्रहाय नमः

निष्परिग्रहः

Niṣparigrahaḥ

Root: nis + parigraha

Liberation·मोक्ष
Meaning

अर्थ

Without possessiveness, in whom there is no parigraha (the accumulation and holding-onto of possessions, the grasping ownership) , the divine ascetic who holds nothing for himself even while encompassing all

आसक्ति के बिना, जिनमें कोई परिग्रह (संपत्ति का संचय और उससे चिपकना, लोभी स्वामित्व) नहीं है , वह दिव्य तपस्वी जो सभी को समेटते हुए भी अपने लिए कुछ नहीं रखते

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

निस्

without, free from

निस्, बिना

परिग्रह

possessiveness, the accumulation of possessions

परिग्रह, स्वामित्व की लालसा, संपत्ति का संचय

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

निष्परिग्रह (आसक्ति के बिना) शिव को अपरिग्रह के परम साधक के रूप में नामित करता है। शिव निष्परिग्रह के रूप में व्यक्तिगत रूप से कुछ नहीं रखते , वे नग्न बैठते हैं एक श्मशान-भूमि पर , फिर भी समस्त अस्तित्व को समेटते हैं। यह निष्परिग्रह की शिक्षा है: वह दिव्य जो अपने लिए कुछ नहीं रखता फिर भी सब कुछ समाहित करता है। जैन नैतिक परंपरा में, अपरिग्रह पाँच महाव्रतों में से एक है। शिव निष्परिग्रह के रूप में इस नैतिकता का दिव्य आदर्श है: अस्तित्व में सबसे शक्तिशाली सत्ता जो किसी चीज को नहीं रखती।

When to Chant

कब जपें

Chant to invoke Shiva's quality of aparigraha , the non-possessiveness that is the ascetic's highest virtue , in its divine, most complete expression.

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