ॐ निर्वृत्तये नमः
निर्वृत्तिः
Nirvṛttiḥ
Root: nis + vṛtti
अर्थ
The state of complete cessation of mental modifications, in whom there is no vṛtti (the modification, fluctuation, or modification of consciousness) , the perfectly still, perfectly clear divine ground prior to all mental waves
मानसिक परिवर्तनों की पूर्ण समाप्ति की अवस्था, जिनमें कोई वृत्ति (चेतना का परिवर्तन, उतार-चढ़ाव, या बदलाव) नहीं है , समस्त मानसिक तरंगों से पहले वह परिपूर्ण शांत, परिपूर्ण स्पष्ट दिव्य आधार
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
निस्
without, free from
निस्, बिना
वृत्ति
mental modification, fluctuation of consciousness
वृत्ति, मानसिक परिवर्तन, चेतना का उतार-चढ़ाव
आधुनिक संदर्भ
निर्वृत्ति (मानसिक परिवर्तनों की पूर्ण समाप्ति की अवस्था) शिव को निर्वृत्ति के रूप में नामित करता है , वृत्ति से मुक्ति। पतंजलि का 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' वही लक्ष्य नामित करता है। शिव निर्वृत्ति के रूप में इस पूर्ण अवस्था के दिव्य आदर्श हैं। भारत की विशाल ध्यान परंपरा , प्राचीन वन-निवासी योगियों से आधुनिक ध्यान केन्द्रों तक , सभी उस निर्वृत्ति का लक्ष्य रखती है जिसे शिव स्वयं मूर्त रूप देते हैं।
कब जपें
ॐChant to invoke Shiva as the perfect nirvṛtti , the consciousness in whom no mental modification arises, the most complete possible model of the yogic goal.
और मोक्ष नाम
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