ॐ सर्वभक्तार्तिनाशकाय नमः
सर्वभक्तार्तिनाशक
Sarvabhaktārtināśaka
Root: sarva + bhakta + ārti + nāśaka
अर्थ
He who destroys the distress and anguish of every devoted heart
सम्पूर्ण भक्तों की आर्ति (पीड़ा/सन्ताप) को नष्ट करने वाले
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all
सब
भक्त
devotee
भक्त
आर्ति
distress, anguish, suffering
आर्ति, पीड़ा, सन्ताप
नाशक
destroyer
नाशक
आधुनिक संदर्भ
आर्ति — गहरी पीड़ा जो हृदय को जलाती है। सर्वभक्तार्तिनाशक भक्तों की वही गहरी पीड़ा नष्ट करते हैं। गजेन्द्र की आर्ति — मगरमच्छ ने पकड़ा, कोई सहारा नहीं — भगवान दौड़कर आए। द्रौपदी की आर्ति — दुर्योधन ने अपमानित किया — कृष्ण ने अनन्त वस्त्र दिए। जब भक्त की आर्ति चरम पर हो — भगवान सबसे तेज़ दौड़ते हैं।
कब जपें
ॐChant during extreme distress, Gajendra Moksha recitation, or when anguish needs urgent divine intervention. Ideal during hospital crises and when pain exceeds human capacity to bear.
और उपचार नाम
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