ॐ प्रीतिवर्धनाय नमः
प्रीतिवर्धनः
Prītivardhanaḥ
Root: prīti + vardhana
अर्थ
He who multiplies love and joy in every devotee's heart
भक्तों के हृदय में प्रेम और आनन्द को बढ़ाने वाले
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
प्रीति
love, joy, delight
प्रेम, आनन्द
वर्धन
one who increases
बढ़ाने वाले
आधुनिक संदर्भ
प्रीतिवर्धन दूसरी बार आया है (पहली बार नाम 245)। पहली बार ISKCON कीर्तन और आँसुओं के संदर्भ में था। पूरी 241-245 शृंखला (अभिप्राय → प्रियार्ह → अर्ह → प्रियकृत् → प्रीतिवर्धन) अब 386-390 में दोहराई गई है। यह पाँच-नामों का भक्ति-चक्र है: उद्देश्य खोजो → प्रेम से अर्पण करो → जानो भगवान योग्य हैं → देखो भगवान तुम्हारे लिए क्या करते हैं → और प्रीति बढ़ती जाती है। यह शाश्वत चक्र है।
कब जपें
ॐChant when devotional love deepens, during ecstatic kirtan, when the five-name bhakti cycle illuminates your practice, or as the closing prayer of this batch. Love keeps growing.
और प्रेम नाम
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