ॐ कृष्णाय नमः
कृष्णः
Kṛṣṇaḥ
Root: kṛṣ
अर्थ
The all-attractive dark lord who draws every soul with irresistible divine magnetism
सर्वाकर्षक श्यामवर्ण भगवान, जो अप्रतिरोध्य दिव्य चुम्बकत्व से हर आत्मा को खींचते हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
कृष्ण
the all-attractive, dark-complexioned
सर्वाकर्षक, श्यामवर्ण
आधुनिक संदर्भ
कृष्ण दूसरी बार आया है (पहली बार नाम 541)। पहली बार 'सबसे प्रिय नाम,' जन्माष्टमी, और दही-हांडी के संदर्भ में था। दोहराव अन्तिम खण्ड में कहता है: कृष्ण सहस्रनाम के दोनों खण्डों में समान रूप से आकर्षक हैं। पहले खण्ड में कृष्ण ने प्रेम-रंग लगाया (541), अन्तिम खण्ड में वही प्रेम गहरा हो गया (818)। कृष्ण-आकर्षण कभी कम नहीं होता, बढ़ता ही जाता है।
कब जपें
ॐChant on Janmashtami, during Hare Krishna kirtan, when the double Krishna creates the Sahasranama's most beloved structural arc.
और प्रेम नाम
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