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ॐ नन्दाय नमः

नन्दः

Nandaḥ

Root: nand

Love·प्रेम
Meaning

अर्थ

The embodiment of pure joy, Krishna's foster-father whose love transcended biology

शुद्ध आनन्द का मूर्तिमान रूप, कृष्ण के पालक पिता जिनका प्रेम जन्म से परे था

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

नन्द

joy, bliss; Nanda Baba

आनन्द; नन्द बाबा

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

नन्द तीसरी बार आया है (पहले नाम 540-region और 781)। नन्दन-नन्द जोड़ी तीसरी बार साथ आई है (780-781 और 958-961 region)। तीन बार! कृष्ण 'नन्दनन्दन' (Nanda's delight) हैं। गोकुल में नन्द बाबा का प्रेम कृष्ण-लीला का सबसे मधुर अध्याय है। तीसरी बार = पालक-पिता का प्रेम तीन चक्रों में शाश्वत। सहस्रनाम अन्त की ओर बढ़ रहा है और 'आनन्द' (joy) सबसे प्रबल भाव है।

When to Chant

कब जपें

Chant on Janmashtami, when foster-parenthood is honoured, or when the triple Nanda makes joy the Sahasranama's closing signature.

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