ॐ अहिंसापरमधर्मिणे नमः
अहिंसापरमधर्मी
Ahiṃsāparamadharmiṇe
Root: ahiṃsā + parama + dharmin
अर्थ
The supreme practitioner of non-violence, for whom non-harming is the highest dharma lived in every interaction with every being
अहिंसा के परम अभ्यासी, जिनके लिए अहिंसा प्रत्येक प्राणी के साथ प्रत्येक संवाद में जी हुई सर्वोच्च धर्म है
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
अहिंसा
non-violence, non-harming
अहिंसा, अहानि
परम
supreme, highest
परम, सर्वोच्च
धर्मी
one who embodies dharma
धर्मी, धर्म का अभ्यासी
आधुनिक संदर्भ
अहिंसापरमधर्मी भारतीय नैतिक दर्शन में सबसे तत्काल पहचाने जाने वाले वाक्यांशों में से एक है, प्राचीन सूत्र 'अहिंसा परमो धर्मः' की प्रतिध्वनि करते हुए जो महाभारत और मनुस्मृति में आता है। दत्तात्रेय का भ्रमण जीवन स्वयं अहिंसा की अभिव्यक्ति है: वे भोजन स्वीकार करते हैं पर मारते नहीं, सबके पास जाते हैं पर किसी को नुकसान नहीं पहुँचाते। गाँधी की व्याख्या में अहिंसा निष्क्रियता नहीं बल्कि सक्रिय प्रेम-शक्ति थी। अहिंसापरमधर्मी दत्तात्रेय इस केन्द्रीय मुद्दे पर हिन्दू और जैन आध्यात्मिक नैतिकता के बीच सेतु हैं।
कब जपें
ॐChant when cultivating non-violence in thought, speech, and action, in animal welfare work, or when seeking the strength to respond to hostility without aggression.
और करुणा नाम
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