ॐ दीनबन्धवे नमः
दीनबन्धुः
Dīnabandhuḥ
Root: dīna + bandhu
अर्थ
The friend of the helpless, the compassionate companion of those who have no one else to turn to
दीनों के बन्धु, उन असहायों के करुणामय साथी जिनके पास और कोई नहीं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
दीन
helpless, destitute, humble
दीन, असहाय, निराश्रित
बन्धु
friend, kinsman, companion
बन्धु, मित्र, सखा
आधुनिक संदर्भ
दीनबन्धु दत्तात्रेय के सबसे सामाजिक रूप से महत्त्वपूर्ण नामों में से एक है। यह दिव्य को स्पष्ट रूप से हाशिए के लोगों का मित्र बनाता है: 'दीन' शब्द नम्र, निराश्रित, असहाय, हर सामाजिक पदानुक्रम के निचले पायदान पर जीने वालों को संदर्भित करता है। इसीलिए दत्त परम्परा ने भारत के कुछ सबसे सामाजिक रूप से क्रान्तिकारी सन्त पैदा किए: 14वीं शताब्दी में पण्ढरपुर के दलित सन्त चोखामेला; सेविका-सन्त जनाबाई; माली-सन्त सावता। वे सभी सामाजिक वर्गीकरण से 'दीन' थे और सभी ने दिव्य को अपना 'बन्धु' (मित्र) पाया।
कब जपें
ॐChant when praying for the destitute and marginalised, in social service work inspired by devotion, or when the devotee themselves feels utterly helpless and alone.
और करुणा नाम
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