ॐ सहस्रनामसुप्रीताय नमः
सहस्रनामसुप्रीतः
Sahasranāmasuprītaḥ
Root: sahasra + nāma + suprīta
अर्थ
He who is supremely delighted by the thousand names, for whom the recitation of His names is the most beloved offering
सहस्र नामों से परम प्रसन्न, जिनके लिए उनके नामों का पाठ सबसे प्रिय अर्पण है
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सहस्र
thousand
सहस्र, एक हजार
नाम
name
नाम
सुप्रीत
supremely pleased, greatly delighted
अत्यन्त प्रसन्न, परम आनन्दित
आधुनिक संदर्भ
हम सौवें नाम पर पहुँचे हैं। सहस्रनाम परम्परा में सौ-नाम का बिन्दु विराम और कृतज्ञता का पड़ाव है: यात्रा का दसवाँ भाग पूर्ण। परम्परा सिखाती है कि सहस्रनाम का हर नाम स्वयं एक पूर्ण मन्त्र है, जो देवता की पूर्ण उपस्थिति को वहन करता है। सभी हजार नाम का पाठ संकलनीय नहीं बल्कि गुणात्मक है: हर नाम बाकी सभी की अनुगूँज को सुदृढ़ और गहरा करता है। सहस्रनामसुप्रीत प्रभु की स्वयं की पाठकर्ता की भक्ति की स्वीकृति है, एक पारस्परिक आनन्द जो उपासक और उपास्य के बीच की सीमा पार करता है।
कब जपें
ॐThe milestone 100th name, celebrating the recitation itself. Chant with special awareness at this juncture that each name spoken is an act of worship that pleases the Lord directly.
और भक्ति नाम
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