ॐ पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमः
पुण्यश्रवणकीर्तनः
Puṇyaśravaṇakīrtanaḥ
Root: puṇya + śravaṇa + kīrtana
अर्थ
He whose hearing and praise are both meritorious acts, for whom both listening to His glory and singing it create spiritual benefit
जिनका श्रवण और कीर्तन दोनों पुण्यकार्य हैं, जिनके लिए उनकी महिमा सुनना और गाना दोनों आध्यात्मिक लाभ उत्पन्न करते हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
पुण्य
meritorious, sacred, beneficial
पुण्य, पावन, लाभकारी
श्रवण
hearing, listening
श्रवण, सुनना
कीर्तन
glorification, praise-singing
कीर्तन, गुणगान, भजन
आधुनिक संदर्भ
भागवत पुराण सिखाता है कि विष्णु के नाम और महिमा के प्रसारण के चार तरीके हैं: स्मरण, कीर्तन, श्रवण और अर्चन। पुण्यश्रवणकीर्तन इनमें से दो को एकसाथ समेटता है और एक महत्त्वपूर्ण व्यावहारिक बिन्दु बनाता है: लाभ पाने के लिए आपको सक्रिय रूप से जपने वाला होना जरूरी नहीं। वह दादी जो शबरीमला की यात्रा नहीं कर सकती लेकिन अपनी रसोई में बैठकर रेडियो पर चलने वाले अय्यप्पा भजन सुनती है, वह बच्चा जो माता-पिता के जप कर रहे भक्ति गीतों के बीच सोता है: दोनों श्रवण के माध्यम से प्रभु की कृपा पा रहे हैं।
कब जपें
ॐChant when listening to Ayyappa bhajans, stotras, or the Sahasranama being recited by others. Even passive hearing of the Lord's name is meritorious.
और भक्ति नाम
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