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ॐ सर्वयज्ञाय नमः

सर्वयज्ञः

Sarvayajñaḥ

Root: sarva + yajña

Devotion·भक्ति
Meaning

अर्थ

He who is all sacrifices, in whom every act of offering and every form of sacred exchange finds its ultimate referent

जो सभी यज्ञ हैं, जिनमें अर्पण का हर कार्य और पवित्र विनिमय का हर रूप अपना अन्तिम संदर्भ पाता है

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

सर्व

all

सब

यज्ञ

sacrifice, sacred offering, ritual

यज्ञ, बलिदान, पवित्र अर्पण

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

वैदिक परम्परा ब्रह्माण्ड को एक विशाल यज्ञ के रूप में समझती है: ब्रह्माण्डीय विनिमय, देना और लेना, जिसमें हर क्रिया अर्पण और ग्रहण दोनों है। सूर्य प्रकाश अर्पित करता है; पृथ्वी ग्रहण करती है और जीवन वापस अर्पित करती है; जीवन श्वास अर्पित करता है; श्वास प्रार्थना अर्पित करती है; प्रार्थना ग्रहण की जाती है और कृपा के रूप में वापस अर्पित की जाती है। इस सार्वभौमिक यज्ञ का भगवद् गीता का वर्णन उसके सबसे गहन अनुच्छेदों में से एक है। सर्वयज्ञ के रूप में अय्यप्पा इस ब्रह्माण्डीय विनिमय नेटवर्क के केन्द्र में प्रभु हैं: वह जिन्हें अन्ततः सभी अर्पण जाते हैं और जिनसे अन्ततः सभी कृपा बहती है। शबरीमला यात्रा इस नेटवर्क में भक्त का प्रवेश है।

When to Chant

कब जपें

Chant during homam, puja, or any sacred ritual offering. The Lord who is all sacrifices receives and embodies every act of offering simultaneously.

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