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ॐ सुखप्रियाय नमः

सुखप्रियः

Sukhapriyaḥ

Root: sukha + priya

Love·प्रेम
Meaning

अर्थ

The one who is fond of joy, who delights in the genuine happiness of devotees and actively wills their flourishing

आनन्द-प्रिय, जो भक्तों की वास्तविक खुशी में प्रसन्न होते हैं और सक्रिय रूप से उनके उत्कर्ष की इच्छा रखते हैं

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

सुख

happiness, joy, wellbeing

सुख, खुशी, कल्याण

प्रिय

fond of, one who loves

प्रिय, प्रेमपूर्ण

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

भगवद् गीता का अध्याय 18 तीन प्रकार के सुख में अन्तर करता है: तामसिक जो सुखद शुरू होता है और भ्रम में समाप्त, राजसिक जो इन्द्रिय सम्पर्क से, और सात्त्विक जो प्रयास के रूप में शुरू होता और स्थायी आनन्द में परिवर्तित होता है। सुखप्रिय प्रभु को इस तीसरे प्रकार का प्रिय के रूप में नाम देता है। दीक्षा का विरोधाभास यह है कि जो अनुशासन के रूप में शुरू होता है धीरे-धीरे वास्तविक आनन्द का स्रोत बन जाता है।

When to Chant

कब जपें

Chant when the path of devotion begins to feel joyful rather than effortful: when the deeksha is not burden but celebration. The Lord is fond of joy; joyful practice most fully expresses His nature.

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