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ॐ सहस्रशीर्षाय नमः

सहस्रशीर्षः

Sahasraśīrṣaḥ

Root: sahasra + śīrṣa

Cosmic Order·ब्रह्माण्डीय व्यवस्था
Meaning

अर्थ

The thousand-headed one, the cosmic person whose consciousness appears as the heads of all beings simultaneously

सहस्र मस्तकों वाले, वह ब्रह्माण्डीय पुरुष जिनकी चेतना एक साथ सभी प्राणियों के मस्तकों के रूप में प्रकट होती है

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

सहस्र

thousand, innumerable

सहस्र, अनगिनत

शीर्ष

head

शीर्ष, मस्तक

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

सहस्रशीर्ष पुरुष सूक्त (ऋग्वेद 10.90) की भाषा को सीधे दत्तात्रेय सहस्रनाम में लाता है। पुरुष सूक्त ब्रह्माण्डीय पुरुष का वर्णन 'सहस्र मस्तक, सहस्र नेत्र, सहस्र पाद, सभी तरफ से पृथ्वी को व्याप्त करते' के रूप में करता है। दत्तात्रेय पर इसे लागू करके सहस्रनाम उन्हें वैदिक पुरुष घोषित करता है। यह नाम उस ग्रन्थ के शीर्षक का भी प्रत्यक्ष सन्दर्भ वहन करता है जो हम जप रहे हैं: सहस्रनाम का अर्थ है 'हजार नाम' और सहस्रशीर्ष का अर्थ है 'हजार मस्तक।' देवता और उनका वर्णन करने वाला ग्रन्थ एक-दूसरे को प्रतिबिम्बित करते हैं।

When to Chant

कब जपें

Chant during Purusha Sukta recitation, when contemplating the cosmic person of the Vedas, or when meditating on Dattatreya's all-pervading presence as the universal being.

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