ॐ वैराग्यमूर्तये नमः
वैराग्यमूर्तिः
Vairāgyamūrtiḥ
Root: vairāgya + mūrti
अर्थ
The embodiment of perfect dispassion, the living form of supreme detachment from all things worldly
सम्पूर्ण वैराग्य के मूर्त रूप, सांसारिक सभी वस्तुओं से परम विरक्ति के जीवन्त स्वरूप
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
वैराग्य
dispassion, detachment
वैराग्य, विरक्ति
मूर्ति
embodiment, form
मूर्ति, साकार रूप
आधुनिक संदर्भ
वैराग्यमूर्ति दत्तात्रेय को वैराग्य के साक्षात् स्वरूप के रूप में वर्णित करता है: वह नहीं जो अनुशासन के रूप में अनासक्ति का अभ्यास करता है, बल्कि वह जो स्वयं विरक्ति है। उनका कोई घर नहीं, कोई सम्पत्ति नहीं, कोई निश्चित दिनचर्या नहीं, कोई पसन्दीदा भोजन नहीं, सर्दी-गर्मी की कोई परवाह नहीं। वेदान्त की शिक्षा में वैराग्य को चार साधनों (साधन चतुष्टय) में से दूसरा बताया गया है। जब आज के शहरी भारतीय अपने उपकरणों और उपभोक्तावाद से 'मुक्त' होना चाहते हैं, वैराग्यमूर्ति एक दिव्य आदर्श प्रस्तुत करता है।
कब जपें
ॐChant when cultivating detachment, during Vedantic study on vairagya, or when worldly entanglements feel overwhelming and liberation is sought.
और मोक्ष नाम
← → arrow keys to navigate