ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय नमः
सर्वयन्त्रात्मकः
Sarvayaṃtrātmakaḥ
Root: sarva + yantra + ātmaka
अर्थ
The one whose self pervades all sacred geometric diagrams, whose consciousness is the inner life and power within every yantra
जिनकी आत्मा सभी पवित्र ज्यामितीय आरेखों में व्याप्त है, जिनकी चेतना प्रत्येक यन्त्र के भीतर आंतरिक जीवन और शक्ति है
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all
सब
यन्त्र
sacred geometric diagram
यन्त्र
आत्मक
whose self it is, pervading
आत्मक, जिनकी आत्मा
आधुनिक संदर्भ
सर्वयन्त्रात्मक दत्तात्रेय को सभी यन्त्रों (पवित्र ज्यामितीय आरेखों) की आंतरिक आत्मा नाम देता है। तन्त्र परम्परा में यन्त्र देवता की ऊर्जा का द्वि-आयामी रूप है। दत्तात्रेय यन्त्र, दत्त सम्प्रदाय के तान्त्रिक अभ्यास में उपयोग किया जाता है, तीन त्रिमूर्ति कार्यों के ज्यामितीय संश्लेषण को समाहित करता है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और आन्ध्र में दत्त मठ पूजा कक्षों में यन्त्र मूर्ति के साथ-साथ पूजा की प्राथमिक वस्तु है।
कब जपें
ॐChant when installing or worshipping any yantra, recognising that the geometry is made alive by Dattatreya's consciousness as its inner self.
और शक्ति नाम
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