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ॐ आनन्दसागराय नमः

आनन्दसागरः

Ānandasāgarāḥ

Root: ānanda + sāgara

Liberation·मोक्ष
Meaning

अर्थ

The ocean of bliss, whose bliss has no shore, no bottom, and no boundary but encompasses all experience as an ocean encompasses all its waves

आनन्द का सागर, जिनके आनन्द का कोई किनारा, कोई तल और कोई सीमा नहीं बल्कि वह उसी तरह सभी अनुभव को समेटता है जैसे सागर अपनी सभी लहरों को समेटता है

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

आनन्द

bliss

आनन्द

सागर

ocean

सागर

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

आनन्दसागर दत्तात्रेय को आनन्द का सागर नाम देता है। दिव्य के आनन्द के लिए सागर का रूपक भारत के सबसे सार्वभौमिक रूप से अनुनादी है। भारत की वेदान्त परम्परा में यह सागर रूपक व्यक्तिगत खुशी और सार्वभौमिक आनन्द के बीच स्पष्ट विरोधाभास को हल करता है। दत्तात्रेय आनन्दसागर के रूप में ब्रह्म की आनन्द-प्रकृति को व्यक्तिगत रूप से सुलभ बनाया गया है।

When to Chant

कब जपें

Chant when the ocean of bliss begins to be directly felt, or when the wave of personal joy recognises itself as a movement in the Ānandasāgara.

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