ॐ भवपाशमोचकाय नमः
भवपाशमोचकः
Bhavapāśamocakaḥ
Root: bhava + pāśa + mocaka
अर्थ
The liberator from the bonds of conditional existence, who releases the souls caught in the knot of repeated birth and death through his liberating grace
भव-पाश से मुक्त करने वाले, जो बार-बार जन्म और मृत्यु की गाँठ में फँसी आत्माओं को अपनी मुक्तिदायक कृपा से छोड़ते हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
भव
conditional existence, becoming
भव, संसार
पाश
rope, bond
पाश, बन्धन
मोचक
liberator, releaser
मोचक, मुक्त करने वाले
आधुनिक संदर्भ
भवपाशमोचक दत्तात्रेय को भव-पाश (बनने/बद्ध अस्तित्व के बन्धन) से मुक्त करने वाले नाम देता है। 'भव' उस बनने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है: कारण और प्रभाव, कर्म और पुनर्जन्म के चक्र में बद्ध अस्तित्व। पाशुपत शैवमत में 'पाश' (रस्सी, बन्धन) प्राथमिक रूपक है। महाराष्ट्र और कर्नाटक की भक्ति परम्परा में दैनिक दत्त नाम-जप को धीरे-धीरे भव-पाश को ढीला करने के रूप में समझा जाता है।
कब जपें
ॐChant when recognising the depth of the bondage of conditional existence and asking for the grace that unties the bhava-pasha knot.
और मोक्ष नाम
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